मुख्य बातें
- बीजामृत बुवाई से पहले बीज और पौध की जड़ों को मिट्टी और बीज से फैलने वाले रोगों से बचाने में मदद करता है।
- 100 किलो बीज के लिए: 5 किलो देसी गाय का गोबर, 5 लीटर गोमूत्र, 50 ग्राम चूना, 1 किलो मेड़ की मिट्टी, 20 लीटर पानी।
- बीज पर लेप लगाकर छाया में सुखाएं, फिर बुवाई करें। दलहन के बीज को सिर्फ डुबोकर निकाल लें।
अच्छी फसल की शुरुआत अच्छे बीज से होती है। रासायनिक खेती में बीज उपचार के लिए फफूंदनाशक दवाएं इस्तेमाल होती हैं। प्राकृतिक खेती में यही काम बीजामृत करता है — यह प्राकृतिक खेती के चार स्तंभों में पहला है।
सामग्री (100 किलो बीज के लिए)
| सामग्री | मात्रा |
|---|---|
| देसी गाय का गोबर | 5 किलो |
| देसी गाय का गोमूत्र | 5 लीटर |
| चूना | 50 ग्राम |
| खेत की मेड़ की मिट्टी | 1 किलो |
| पानी | 20 लीटर |
बनाने की विधि
- शाम को: 5 किलो गोबर को एक कपड़े में बांधकर पोटली बना लें और 20 लीटर पानी में लटका दें। इसे 12 घंटे (रात भर) पानी में रहने दें।
- साथ ही: 1 लीटर पानी में 50 ग्राम चूना घोलकर रात भर रख दें।
- अगली सुबह: गोबर की पोटली को पानी में ही तीन बार अच्छी तरह निचोड़ें, ताकि गोबर का सार पानी में आ जाए।
- उस पानी में 1 किलो मेड़ की मिट्टी डालकर हिलाएं।
- फिर 5 लीटर गोमूत्र और रात भर रखा चूने का पानी मिलाएं और अच्छी तरह घोलें।
बीज उपचार कैसे करें
- बीज को किसी साफ सतह या तिरपाल पर फैलाएं और ऊपर से बीजामृत डालकर हाथ से मिलाएं, ताकि हर बीज पर हल्की परत चढ़ जाए।
- दलहन (चना, मूंग, उड़द, मटर) के बीज का छिलका पतला होता है — इन्हें बीजामृत में सिर्फ जल्दी से डुबोकर निकाल लें।
- उपचारित बीज को छाया में अच्छी तरह सुखाएं, फिर बुवाई करें।
- धान और सब्ज़ियों की पौध की जड़ों को रोपाई से पहले बीजामृत में डुबोया जा सकता है।
सावधानी: बीज को धूप में न सुखाएं और उपचार के बाद लंबे समय तक न रखें — उसी दिन या अगले दिन बुवाई कर दें। बीज की अंकुरण क्षमता पहले से जांच लें।
किसानों के सवाल
बीजामृत कितनी देर में तैयार होता है?
गोबर की पोटली को 12 घंटे पानी में रखना होता है, इसलिए इसे एक शाम पहले शुरू करें। अगली सुबह घोल तैयार हो जाता है।
एक बार बना बीजामृत कितने बीज के लिए काफी है?
ऊपर दी गई मात्रा लगभग 100 किलो बीज के लिए है। कम बीज हो तो सभी सामग्री उसी अनुपात में घटा दें।
क्या बीजामृत गेहूं के बीज के लिए भी है?
हां। गेहूं, धान, मक्का, सब्ज़ियों और ज़्यादातर फसलों के बीज के लिए बीजामृत का इस्तेमाल किया जाता है।
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