जैविक घोल और बायो-इनपुट का काम शुरू करना है? ₹1 लाख से ₹50 लाख तक की 5 सरकारी मदद, जाऩें आपके लिए कौन-सी सही?

जीवामृत-घनजीवामृत बेचने से लेकर नया जैविक उत्पाद बनाने तक, सरकार ₹1 लाख से ₹50 लाख तक मदद देती है। जानिए आपकी स्थिति के लिए कौन-सी योजना सही है।

भारतीय किसान क्लब6 मिनट पढ़ें

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन का लक्ष्य 1 करोड़ किसानों तक पहुंचना है। इतने किसान अगर रासायनिक खाद कम करेंगे, तो उन्हें घनजीवामृत, जैव-उर्वरक और नीमास्त्र जैसे इनपुट भी चाहिए। यही एक नया ग्रामीण कारोबार है।

सरकार इसके लिए कई तरह की मदद देती है। पर हर योजना अलग तरह के लोगों के लिए है। गलत योजना में आवेदन करने से समय भी जाता है और भरोसा भी। यह लेख आपको सही रास्ता चुनने में मदद करेगा।

एक नजर में तुलना

योजना कितनी मदद किसके लिए किस काम के लिए
बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) ₹1 लाख प्राकृतिक खेती करने वाले किसान/समूह गांव में घोल-खाद बनाकर बेचना
RKVY-RAFTAAR (आइडिया स्तर) ₹5 लाख तक नए कृषि उद्यमी आइडिया को शुरुआती रूप देना
RKVY-RAFTAAR (सीड स्तर) ₹25 लाख तक कृषि स्टार्टअप तैयार उत्पाद को बाजार तक ले जाना
स्टार्टअप इंडिया सीड फंड ₹20 लाख अनुदान + ₹50 लाख कर्ज तक DPIIT मान्यता वाली कंपनी प्रोटोटाइप, ट्रायल, बाजार
BIRAC BIG ₹50 लाख तक स्नातक व्यक्ति या बायोटेक स्टार्टअप नया वैज्ञानिक उत्पाद

1. बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC): गांव के किसान के लिए सबसे आसान रास्ता

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के तहत देश में 10,000 BRC बनाए जाने हैं। अप्रैल 2025 में इनके दिशानिर्देश जारी हुए।

  • मदद: ₹1 लाख, ₹50,000 की दो किस्तों में। इसमें शेड या किराए का खर्च शामिल नहीं है।
  • शर्त: संचालक खुद प्राकृतिक खेती करता हो या समूह में इसका अनुभवी सदस्य हो।
  • काम: स्थानीय मिट्टी और फसल के हिसाब से घोल और खाद बनाना, सस्ते दाम पर बेचना, और किसानों को प्रशिक्षण देना।
  • सलाह: विशेषज्ञों ने कहा है कि ₹1 लाख केंद्र चलाने के लिए कम हो सकता है। इसे शुरुआती सहारा समझें, पूरी पूंजी नहीं।
  • कहां संपर्क करें: कृषि विभाग, कृषि विभाग की आत्मा (ATMA) परियोजना या जैविक प्रमाणीकरण संस्था।

2. RKVY-RAFTAAR: कृषि उद्यमियों के लिए ₹5 लाख और ₹25 लाख

कृषि मंत्रालय की यह योजना देश के 24 कृषि व्यवसाय इनक्यूबेटर (R-ABI) और 5 नॉलेज पार्टनर के जरिए चलती है। इनमें ज्यादातर कृषि विश्वविद्यालयों और प्रमुख संस्थानों में हैं।

  • आइडिया/प्री-सीड स्तर: ₹5 लाख तक (90% अनुदान, 10% अपना योगदान)। इससे पहले 2 महीने का उद्यमिता कार्यक्रम होता है, जिसमें ₹10,000 मासिक मिलता है।
  • सीड स्तर: ₹25 लाख तक (85% अनुदान, 15% अपना योगदान)।
  • अब तक 1,700 से ज्यादा कृषि स्टार्टअप को मदद मिल चुकी है।
  • आवेदन: agristartup.gov.in और नजदीकी R-ABI की कॉल के जरिए। तारीखें हर इनक्यूबेटर की अलग होती हैं।

किसके लिए सही: जिसके पास बायो-इनपुट को ब्रांड, पैकेजिंग या सप्लाई के नए मॉडल के साथ बेचने का विचार है।

3. स्टार्टअप इंडिया सीड फंड: रजिस्टर्ड कंपनी के लिए

  • मदद: प्रोटोटाइप और ट्रायल के लिए ₹20 लाख तक अनुदान। बाजार में उतरने के लिए ₹50 लाख तक कर्ज या कन्वर्टिबल डिबेंचर।
  • शर्तें: DPIIT मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हो, कम से कम 51% भारतीय हिस्सेदारी हो, और किसी दूसरी सरकारी योजना से ₹10 लाख से ज्यादा मदद न ली हो।
  • ध्यान दें: अकेला व्यक्ति आवेदन नहीं कर सकता। कंपनी, LLP या पंजीकृत साझेदारी चाहिए।
  • आवेदन: seedfund.startupindia.gov.in पर, योजना से जुड़े 300 से ज्यादा इनक्यूबेटरों के जरिए।

क्रम का ध्यान रखें: अगर आपने पहले किसी दूसरी योजना से ₹10 लाख से ज्यादा ले लिया, तो इस योजना के दरवाजे बंद हो सकते हैं। इसलिए पहले योजना बनाएं, फिर आवेदन करें।

4. BIRAC BIG: नए वैज्ञानिक उत्पाद के लिए ₹50 लाख

  • मदद: 18 महीने तक, ₹50 लाख तक का अनुदान। राशि लक्ष्य पूरे होने पर किस्तों में मिलती है।
  • किसके लिए: किसी भी विषय में स्नातक व्यक्ति (इनक्यूबेटर में रहकर) या 5 साल से कम पुरानी बायोटेक कंपनी।
  • किस काम के लिए: कुछ नया और वैज्ञानिक, जैसे नया सूक्ष्मजीव उत्पाद या लंबे समय तक टिकने वाला जैविक कीट नियंत्रक। पारंपरिक घोल बेचना इसमें नहीं आता।
  • अगली कॉल: BIRAC आमतौर पर जनवरी और जुलाई में कॉल खोलता है। अक्टूबर 2026 में कोई कॉल खुली नहीं थी, इसलिए अगली कॉल जनवरी 2027 के आसपास संभावित है (अभी घोषित नहीं)।

5. खुद खेती करने वाले किसान के लिए

अगर आप कारोबार नहीं, सिर्फ अपने खेत में जैविक इनपुट इस्तेमाल करना चाहते हैं:

  • परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY): समूह में जैविक खेती करने पर जैविक इनपुट के लिए 3 साल में ₹31,000 प्रति हेक्टेयर, DBT से सीधे खाते में।
  • राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन: प्रशिक्षण, कृषि सखियों की मदद और खेत पर खाद बनाने के ढांचे के लिए प्रोत्साहन। पूरी जानकारी यहां पढ़ें।

एक पुरानी योजना के बारे में सावधानी: इंटरनेट पर NABARD की “पूंजी निवेश सब्सिडी योजना” (जैव-उर्वरक इकाइयों के लिए ₹40 लाख तक) की जानकारी अब भी मिलती है। पर NABARD की वेबसाइट के अनुसार 2021-22 से इसके जारी रहने की पुष्टि नहीं आई है। अगर कहीं से प्राप्त जानकारी के आधार पर आप आवेदन करना करना चाहते हैं तो आवेदन से पहले अपने बैंक या NABARD कार्यालय से पुष्टि करें।

आपके लिए कौन-सी योजना?

  • गांव में घनजीवामृत-नीमास्त्र बनाकर बेचना है? → BRC से शुरुआत करें।
  • बायो-इनपुट का ब्रांड या नया सप्लाई मॉडल बनाना है? → RKVY-RAFTAAR का आइडिया स्तर।
  • कंपनी रजिस्टर्ड है और प्रोटोटाइप तैयार करना है? → स्टार्टअप इंडिया सीड फंड या RKVY सीड स्तर।
  • नया वैज्ञानिक उत्पाद बनाना है? → BIRAC BIG।
  • सिर्फ अपने खेत में प्राकृतिक खेती करनी है? → PKVY और प्राकृतिक खेती मिशन।

सावधानी की तीन बातें

  1. किसी एजेंट को पैसा न दें जो योजना “पक्की” करवाने का दावा करे। आजकल अधिकांश योजऩाओं के आवेदन सरकारी पोर्टल या विभाग के जरिए होते हैं।
  2. अनुदान आमतौर पर किस्तों में मिलता है, काम आगे बढ़ने पर। शुरुआती खर्च की तैयारी रखें।
  3. नियम बदलते रहते हैं। आवेदन से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर ताजा दिशानिर्देश जरूर पढ़ें।

सार

अगर आपको प्राकृतिक खेती में रुचि हैं और आप चाहे तो छोटी शुरुआत BRC से करें, काम चलने लगे तो RKVY-RAFTAAR या सीड फंड की ओर बढ़ सकते हैं। इस हफ्ते अपने जिला कृषि कार्यालय से BRC के बारे में पूछें।

और योजनाएं: सरकारी योजनाएं


स्रोत

  • BIRAC
  • कृषि स्टार्टअप
  • बायो-इनपुट
  • बायोटेक स्टार्टअप
  • सरकारी योजना
  • स्टार्टअप अनुदान
  • ₹50 लाख अनुदान

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यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। अपनी मिट्टी, फसल और मौसम के अनुसार नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से सलाह ज़रूर लें। किसान कॉल सेंटर: 1800-180-1551

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